A letter to Comrade Prabudh related to his article

Hey Prabudh, I liked your article Dadri to Hathras.  Although I am not a trained sociologist unlike yourself, I count myself as among the very few who understand Rajputs holistically – with their minute tribal regional histories, migrations, & demography. I had written this article sometime back on Youth Ki Awaaz here : https://www.youthkiawaaz.com/2020/10/issues-with-rajput-hindutv-why-the-liberals-must-instead-embrace-rajputs/?success=1 AsContinue reading “A letter to Comrade Prabudh related to his article”

ब्राह्मण राजनीति सदैव क्षत्रिय विरोधी रही है।

महेंद्र सिंह ✍️ एक वर्ग है इस देश में और उसका एक मात्र मकसद होता है अपना स्वार्थ सिद्ध करना,,, आज़ादी से पहले राजपूतो का जयकारा लगाता रहा ये वर्ग ,, उसका सहयोगी बना रहा,, पूंजीपति वर्ग का सहयोग लेता रहा,, राजपूतो और हिन्दुओ की अन्य जातियों के बीच इस वर्ग ने हमेशा दूरी बनायेContinue reading “ब्राह्मण राजनीति सदैव क्षत्रिय विरोधी रही है।”

rAjaputra – story of the term and its application

This is not the only one. Many people ask for proof of Rajputs prior to even 1300-1500 AD. So let’s use this opportunity to enhance our understanding. What is the story of this term Rajput or rAjaputra? Literal meaning of rAjaputra is – son of a King or royal child. Earliest recorded reference to thisContinue reading “rAjaputra – story of the term and its application”

राजपूत और लोकतंत्र का चक्रव्यूह

Rajanyas Chronicles ✍️ #राजतन्त्र की भावना लेकर, लोकतंत्र में अस्तित्व बचाना ,नामुमकिन है…#अगर लोकतंत्र में जीना है,तो सिस्टम में घुसना ही पड़ेगा . बाहर से आप सिर्फ छटपटाते रहेंगे,जीत नही सकते….#क्षत्रियों की आदत है कि सिस्टम से बाहर निकलकर लड़ाई करते हैं। और फिर हारकर निराश होते हैंजबकि और सभी लोग धीरे-धीरे सिस्टम पर कब्जाContinue reading “राजपूत और लोकतंत्र का चक्रव्यूह”

राजपूत सामाजिक विश्लेषण : आगे का रास्ता

Rajanyas Chronicles ✍️ इतिहास में 99.9 % राजपूत आम सैनिक और किसान रहे हैं। पुराने जमाने मे राजपूत परिवार अपने वंश/कुल/भाईबंध के जागीरदार/ठिकानेदार/तालुकेदार के आश्रित होते थे। जागीरदार आदि ही जमीन के मालिक होते थे और बाकी राजपूत इनके आश्रय पर जीते थे और जरूरत पड़ने पर इनके लिये युद्ध में शामिल होना उनके लियेContinue reading “राजपूत सामाजिक विश्लेषण : आगे का रास्ता”

What are the controversies related to Rajput history?

Sangraam ✍️ Myths of origin Many scholars have attributed foreign origin to Rajput clans,especially in the case of the popular legend of Agnikula or the “fire clan”. It is obvious nobody’s born out of fire. So this led some to assume these tribes were alien immigrants who took some priestly help to invent a mythContinue reading “What are the controversies related to Rajput history?”

राजपूत सामाजिक विश्लेषण

इतिहास में 99.9 % राजपूत आम सैनिक और किसान रहे हैं। पुराने जमाने मे राजपूत परिवार अपने वंश/कुल/भाईबंध के जागीरदार/ठिकानेदार/तालुकेदार के आश्रित होते थे। जागीरदार आदि ही जमीन के मालिक होते थे और बाकी राजपूत इनके आश्रय पर जीते थे और जरूरत पड़ने पर इनके लिये युद्ध में शामिल होना उनके लिये अनिवार्य होता था।Continue reading “राजपूत सामाजिक विश्लेषण”

राजपूत और बॉलीवुड: सुशांत सिंह राजपूत के संदर्भ में

सुशांत की मौत का जिम्मेदार उसके नाम के साथ लगा ‘राजपूत’ था। इस भारत राष्ट्र राज्य में राजपूत सबसे ज्यादा उत्पीड़ित जाति है। Establishment के साथ बॉलीवुड और मेंस्ट्रिम मीडिया किस तरह राजपूत फोबिया से ग्रस्त है ये समय समय पर दिखता रहता है। कंगना र औनणौत का उदाहरण सामने है।‌ किस तरह रविन्द्र जडेजाContinue reading “राजपूत और बॉलीवुड: सुशांत सिंह राजपूत के संदर्भ में”

समाज में क्रांति हेतु भीड़ नहीं, उद्देश्य और नियमित प्रयास चाहिए।

Amit Singhji ✍️ समाज में क्रांति या बदलाव लाने के लिए भीड़ नहीं ,बल्कि उद्देश्यपूर्ण लक्ष्य एवं नियमित प्रयासों की आवश्यकता होती है| समाज में ऐसे अनेक व्यक्ति हुए हैं ।जिनके द्वारा शुरू किए गए साहसिक प्रयासों ने समाज एवं राष्ट्र को लाभांवित करने का प्रयास किया गया, और उनका यह प्रयास सफल भी हुआContinue reading “समाज में क्रांति हेतु भीड़ नहीं, उद्देश्य और नियमित प्रयास चाहिए।”

राजनैतिक सामाजिक समझ : राजपूतों की अज्ञानता और पतन का कारण

————————————–_———– नितिन सिंह राणा ✍️ ————————————–_———– लोकतंत्र (लूट तंत्र) देश आजाद होने से आज तक की बात करें तो राजपूतों की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति निरंतर कमजोर होती जा रही है, और आजादी से पहले जिन वर्गों की स्थिति दयनीय थी वह आज पूर्णतया संपन्न हो चुके हैं, इस लोकतंत्र में मात्र अकेली राजपूत कौमContinue reading “राजनैतिक सामाजिक समझ : राजपूतों की अज्ञानता और पतन का कारण”