राजपूत समाज और बाकी समाज के नेतृत्व में बहुत बड़ा फर्क है (Absent leadership of the Rajput public)

Ravi Singh ✍️

राजपूत समाज और बाकी समाज के नेतृत्व में बहुत बड़ा फर्क है:-

 1.राजपूत समाज में कोई भी नेता किसी भी दल में शामिल होता है या फिर किसी पार्टी से जीतकर आता है तो उसे हम अपना नेता मान लेते हैं I दिन रात उसके गुणगान शुरू हो जाते हैं, बेशक उसके अंदर है कि समाज के लिए कोई भावना हो या न हो । 
जबकि दूसरे समाज का बड़ा नेता वही बनता है जो उसके समाज के हक की बात करता है उनके लिए राजनीतिक दल और पार्टी मजबूरी नहीं होती । 


2. हमारे समाज में नेता वही स्वीकार है जिसके पास बहुत सारा पैसा हो बहुत बड़ा नाम हो गाड़ी-बंगला सब कुछ होना चाहिए तभी राजपूत समाज आपको नेता मानेंगे या फिर आपका महत्व है अन्यथा नहीं I
जबकि दूसरे समाज में ये महत्त्वपूर्ण नहीं वहां अपने जाति के लिए लड़ते हैं बोलते हैं जाति के लिए काम करते हैं तो आपका नेतृत्व जाति स्वीकार कर लेती है


3. हमारे समाज के नेताओं के आगे पार्टी भक्ति से बाहर निकलने का डर होता है वह पार्टी लाइन से बाहर जाकर समाज के लिए खड़े नहीं होते , अपवाद को छोड़कर । 
बहुत बड़े नाम क्षमतवान व्यक्तित्व भी राजनीतिक दल में सिर्फ उनकी गुलामी करते हैं वह अपने समाज को भी छोड़ दें तो जनसामान्य की आवाज नहीं बन पाते । 
जबकि इसके विपरीत दूसरे समाज के नेता पार्टी लाइन से बाहर जाकर भी अपनी मांग मंगवा लेते हैं । उनको जितना ही नेतृत्व मिले उतने में ही अपने समाज का कल्याण कर जाते हैं इस तरह सर्वमान्य नेता भी बन जाते हैं। 


4. हमारे समाज में आज तक जितने नेता और नेतृत्व मिले हैं वह (सबके)नेता बनते हैं अपने जात का कोई नेता न बनता I
एक छोटा कार्यकर्ता भी सबकी बात करता हैं लेकिन अपने समाज के हक और अधिकार की नहीं । 
दिन-रात सर्व समाज सर्व समाज की नौटंकी । 
जबकि दूसरी किसी जाति या समाज को सर्व समाज की चिंता नहीं है होती भी है.. होती भी है तो सबसे पहले वह अपने समाज का हित साध लेते हैं फिर कोई बात होती है सर्व समाज ।


5.हमारे समाज की आज की सबसे बड़ी बीमारी हिंदू-हिंदुत्व , हमारे समाज में हर एक छोटी बात में हिंदू हिंदुत्व ढूंढ़ने लगते हैं । हमारे समाज में 95% लोग इस रोग से ग्रसित है । हमेशा हिंदुत्व ही खतरे में रहता है और हमारा समाज बली का बकरा बनने को हमेशा तत्पर रहता है । 
जबकि दूसरे समाज में ये कोई मायने नहीं रखता और न ही उनका हिंदुत्व खतरे में पड़ता है वह खुल कर जातिवाद भी करते हैं और सत्ता का भोग भी खुलकर । 
#निष्कर्ष = बहुत सी बातें हैं जो अधूरी रह गई हैं लेकिन पहले आप लोगों की राय जान लूं आप सभी इन वाक्यों से कितना ताल्लुक रखते हैं या फिर इनमें कितनी सत्यता हैं ।
जय भवानी 👏

Published by voiceofrajputs

In the Past 30 years or so, the community has witnessed decline- socially, economically and politically, one of the root causes of this multifaceted decline being - the Intellectual decline & alienation of the Community. Hence an attempt to rectify it.

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