मुगलों से कुछ वैवाहिक संबंधों पर शर्मिंदा होना बंद करो।

Pushpendra Rana ✍️

मुगलों से कुछ वैवाहिक संबंधों पर शर्मिंदा होना बंद करो। आपको तो गर्व होना चाहिए कि इतने लंबे, हजारों साल के इतिहास में, इतने बड़े भूभाग और इतनी बड़ी संख्या में होने के बाद भी आपकी जाति पर अगर कोई लांछन लगाया जाता है तो वो भी ऐसा जिसमे लज्जित होने जैसा कुछ भी नही। राजा महाराजो के रिश्ते तो राजा महाराजो में ही होते थे, पुरातन काल से ये चलन है संधि के लिए विभिन्न जाती समुदायों के राजशाहीयो के बीच में वैवाहिक संबंधों का। राजाओं में ही ऐसा होता है। और बाकायदा ब्याह होता था। आज भी उच्च वर्ग में ऐसा होता है। जो आप को चिढ़ाते हैं वो तो दो बीघा जमीन के लिए अपनी औरतों को वैश्या बना देते थे। 

आपको गर्व होना चाहिए कि इतने लंबे चौड़े इतिहास में उनको राजपूतो को नीचा दिखाने के लिए राजपूतो द्वारा कोई लूटमार, बलात्कार, व्यभिचार, भ्रष्ट आचरण के खास प्रमाण नही मिले। जबकि जिन जातियों ने 40-50 साल भी शासन किये हैं उनका इतिहास अपनी ही प्रजा से लूट मार करना, व्यभिचार, बलात्कार, भ्रष्ट आचरण से भरा पड़ा है चाहे कुछ दशक राज करने वाले पेशवा हो, सिक्ख हो या दो सौ साल राज करने वाले मुगल। राज करने वालो का ही इतिहास लिखा जाता है और उसपर चर्चा होती है और यह भी सत्य है कि दुनिया भर में राजशाहीयो में किस किस तरह के व्यभिचार होते हैं और सत्ता के लिए किस तरह का भ्रष्टाचार होता है। शासक वर्ग का चरित्र कभी अच्छा नही माना जाता। 

लेकिन राजपूत दुनिया की अकेली ऐसी जाती है जो हजारों साल इतने बड़े भूभाग और संख्या में शासन में होने के बावजूद जिसका इतिहास कुछ अपवादों को छोड़कर इन सब दोषों से बिलकुल मुक्त रहा। यह दुनिया का आठवां अजूबा है। राजपूत अकेली जाती है जिसके आचरण और चरित्र की तारीफ इतिहास में खुद उनके विरोधियों ने की है। 

जो लोग राजपूतो को ताना मारते हैं वो खुद मुगलों से अपने संबंध पर गर्व करते हैं। ये लोग हिंदूवादी मान सिंह को गाली देते हैं लेकिन अपना धर्म छोड़ दीन ए इलाही अपनाने वाले बीरबल और टोडरमल को अपनी जाती का बताने के लिए इन आधा दर्जन जातियों में लड़ाई छिड़ी हुई है। खुद दिन्दुवादी तक बीरबल और टोडरमल पर गर्व करते हैं। इन्होंने खुद मुस्लिम शासकों से कितने रिश्ते किये हैं लेकिन इनको इससे शर्मिंदगी की जगह गर्व होता है इसलिये कोई इनपर ताना नही मार सकता। ये लोग तो आज की राजनीति में भी गर्व से मुसलमानो के सहयोगी बन मजे ले रहे हैं और इन्हें उसके लिए कोई हिंदूवादी ताना नही मारता लेकिन राजपूत समाज इतना सब करने के बाद भी कुछ वैवाहिक संबंधों पर शर्मिंदा है।

इतने लंबे चौड़े इतिहास में इनको ताना मारने के लिए मात्र कुछ वैवाहिक संबंध मिले जिसमे शर्मिंदगी वाली कोई बात ही नही। ये शर्मिंदगी छोड़िये। इतने लंबे चौड़े इतिहास में भ्रष्टाचार व्यभिचार की जगह इन्हें सिर्फ ये मिला। ये तो गर्व की बात है। गर्व करिए आप दुनिया की सबसे चरित्रवान शासक जाती हैं। गर्व करिए अपने इस इतिहास पर। ये लोग खुद ताना मारना छोड़ देंगे।

Published by voiceofrajputs

In the Past 30 years or so, the community has witnessed decline- socially, economically and politically, one of the root causes of this multifaceted decline being - the Intellectual decline & alienation of the Community. Hence an attempt to rectify it.

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